पहाड़ मुझे नज़दीक जाकर भी ख़ूबसूरत लगता है। यह मेरा प्यार है। जैसे ही पहाड़ पर पहुँचता हूँ लगता है कि घर में हूँ ; दिल में आता है कि वापिस न जाऊँ। भीतर एक किताब पर रखा है पहाड़; पेपर-वेट बता कर । किसी और जन्म पढ़ा -सुना था कि पहाड़ महज़ पहाड़ नहीं , बल्कि किसी देश का सुन्दर राजकुमार है। अमृतित्व के वरदान से मुक्त होने के लिए समाधि में बैठ गया था। उस जन्म से ही ये सारे पहाड़ मुझे उसके ही वंशज लगते हैं; उसके ही पुत्र-पुत्रियाँ। यहीं कहीं किसी पहाड़ी में मैंने अपना आप खो दिया था; अब बार बार अपने आप को ढूंढ़ने जाता हूँ । ये किसी जन्म का राजकुमार मेरा मित्र है। कभी कभी पहाड़ को मैं इस आस में देखता हूँ, कि इस जन्म मेरे बैठने से पहले ये अपनी समाधि से उठेगा और मुझे अपनी बाहों में भर लेगा।

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