कई सालों तक मैंने सोचा कि अगर ईश्वर कविता पढ़ता हैं। यह मेरे लिए बहुत ही रहस्यमयी सवाल रहा है। इन दिनों में ये और भी गहरा हो गया है। अगर हां, तो किस भाषा में? मैं ईश्वर की भाषा जानना चाहता हूं। अगर नहीं तो मैं उसे यह भाषा सिखाने की हिम्मत नहीं करूंगा। ईश्वर एक अच्छा छात्र है, मुझे पता है।

एडोनिस को सुनते हुए

एडोनिस मुझे पसंद है, नहीं पता कि क्यों। जैसे यात्रा पर निकलते वक़्त हम समान बांधते हैं, इन दिनों मैंने स्टडी से अपनी पसंदीदा पुस्तकों उठा कर घर के विभिन्न कोनों में टेबल पर रख दी सहम कर आदमी एक कोने की तरफ भागता है, दीवार की और नहीं । मेरे पास घर में ऐसे तीन कोने हैं; एक कोना है जहाँ से पूरा घर दिखाई देता है। डर आदमी को धीरे-धीरे एक जगह जमा कर देता है। मैं इस कोने में बैठता हूं और कविताएं पढ़ता हूं। मुझे लगता है मैं घर की सुरक्षा कर रहा हूँ। एडोनिस के साथ मुलाकात वाला वीडियो देख रहा था। एक वीडियो आता है जिसमें कोई उपशीर्षक नहीं है। एडोनिस अपनी भाषा में बोल रहा है। मैं वीडियो को चाह कर भी रोक नहीं सका। मैंने उसे करीब 25-30 मिनट तक सुना। उसकी कविताएं, उसकी आवाज़, उसकी पिच मुझे राहत दे रही है। कोई व्यक्ति बिना भाषा के कितनी बातें करता है? पूरे वीडियो के दौरान मैं कभी-कभी यह भूल जाता हूं कि जो फिकरे एडोनिस के मुंह से निकल रहे है वो एक भाषा है। नहीं, वो सिर्फ एक ध्वनि है; मातर एक ध्वनि। एक संगीत। जैसे बर्तन गिरने की आवाज, पेज पलटने की आवाज, सब्ज़ी बनने की आवाज, दिल धड़कने की आवाज, फोन की घंटी, एक पेन से कागज पर फिसलते हुए अकार की आवाज[ गिलास में पानी गिरने की आवाज, पानी में कुछ ठोस डूबने की आवाज़। एक आहट की आवाज, उम्मीद की आवाज। दरवाजे के खुलने से अंदर आती रौशनी की आवाज। खामोशी की आवाज, जो हमेशा कान में सुनाई देती है। इतनी आवाजें जो इन दिनों सुनी जा रही हैं। तारा टूटने की आवाज़ और आशा।

एडोनिस कोई कविता नहीं पढ़ रहा है, वो कोई जवाब नहीं दे रहा है और न ही किसी भाषा में बोल रहा है। वो एक कवी के भीतर से आती आवाज है, जो मेरी आत्मा में उतर रही है।

आवाजें आत्मा की दरार भर्ती हैं।

कवि और क्वारंटाइन

कवि हमेशा अलगाव में रह सकता है। भीतर को भागता है। कविता इस दुनिया से बाहर जाने का रास्ता है; यही उसका जुड़े रहने का तरीका है। दूसरी दुनिया में रहना, और लोगों को मिलना, और भूमि बनाना। कुछ कुछ सपनों की तरह, पर सारा नहीं  एक समानांतर ब्रह्मांड। इस दुनिया पर कोई ताला नहीं है लेकिन कवि के पास इसकी चाबी होती है। वो एक वरदान देता है जो उसके पास भी नहीं होता। वह बार-बार जाता है, वापस आता है, फिर चला जाता है। इस सब में आप देखेंगे कि वह वहां यात्रा करता है, रहता नहीं। एक निरंतर यात्रा; अज्ञात से अज्ञात में। कवि को जीवन भर उस दुनिया के रास्ते का पता नहीं होता। कभी-कभी कविता में एक आदमी उल्टा चलता है। बीज के लिए थोड़ी मिट्टी लाता है, सुगंध के लिए एक शरीर लाता है, सपने के लिए नींद; और मानव के लिए आशा, रोशनी के लिए शरीर, रोशनी का घर। कवि केवल भाषा या शब्दों से कविता नहीं लिखता। थोड़ा सा कुछ किसी दूसरे में संभाल देता है। कविता किसी व्यक्ति को मौत के आंकड़ों में नंबर होने से भी बचाती है। आपको उसका रास्ता गलत लग सकता है, व्यक्ति गलत हो सकता है; लेकिन क्या करें। हमेशा याद रखें कि आप कवि के लिए सिर्फ एक आँकड़ा नहीं हैं। आज भी, मैं गहरी सांस लेकर अंदर उतरता हूँ, कि कविता कहीं लिखी जा रही है। मैं घर जाता हूं, मैं घर देखता हूं, अपनी बाहों में भर लेता हूं। पृथ्वी, कवी की यह यात्रा तोड़ती नहीं[ बल्कि इसे भूलने का एक तरीका देती है, वापस आने के सपने के साथ।

जब भी आप किसी कवि से पूछोगे कि वह कहाँ जाता है,

तो उसका उत्तर ‘पता नहीं’ है।


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