कॉरिडोर में जगते बुझते बल्ब की रौशनी खिड़की से अंदर कमरे में आकर तड़प रही है. अगर मैं कहूँ कि इसे देखकर मुझे तुम्हारी आँखें याद आती हैं, तो क्या तुम इसे भी कविता कह कर भूल जाओगी?

दीये का बुझ जाना
मोमबत्ती का पिघलना
तारों का टूटना
चाँद का राख होना;

रात की रानी जग जाना
सूरज, लाल, गुलाबी, पीला और फिर नीला हो जाता है

आँख के आख़री गुम्बद में कैद नर्तकी के पैरों पर जो छाले हैं वो इसी सहकती रौशनी का क्लाइमैक्स लगते हैं, हालांकि क्लाइमैक्स जैसी कोई चीज नहीं होती; सिर्फ कहानियाँ होती हैं. एक बल्ब है, थकी हुई टिमटिमाती रोशनी है; मैं हूँ, कॉरिडोर है और कहानी है. तेज हवा में तानसेन छोटे से कोने से उठा, उड़ा; अपनी धुन में मस्त. मेरे अंदर और बाहर का सारा कंक्रीट एक सिम्फनी में तब्दील हो रहा है.

अधखुले दरवाजे,
खिड़कियां;
बल्ब के नीचे पड़ा ये कॉरिडोर एक नई रहस्मयी दुनिया का अनुवाद है.

संसार, जो मेरा नहीं; काया स्पर्श से दूर. रिश्ते अजनबी, लोग अनजान; चेहरे न समझ में आते, न समझते. मैंने देखा है, कॉरिडोर की दूसरी ओर अनंत एकांत की तरफ खुलती खिड़की है; तुम यहीं कहीं दिखाई देती हो , खोया हुआ रास्ता थामे हुए. अभी अभी बल्ब का कच्चा कांच मेरे खून में फटा है. मेरे पुराने कॉरिडोर दोस्त का यूँ अजनबी हो जाना मुझे हैरान करता है; और दिलचस्प बात यह है कि ये वह जगह है जहां मैं हर रात बिताता हूँ.

दादी की सुनाई जादुई कहानियाँ कमरे से बाहर उग रही है, जिनमें परियों के नाम नहीं होते.

कॉरिडोर, बिना पटकथा के एक फिल्म बनता जा रहा है.

एक आवाज मेरे अंतर्मन में गूँजती है;
अंदर एक जादूगरनी का घड़ा है,
जिस में मैं सर उठाये एक टांग पर खड़ा हूँ
कोण, त्रिकोण, गुलाई;
यह बल्ब केवल रौशनी को ही नहीं,
इसके रेखागणित को भी जानता है.

कांपती रोशनी में तुम्हारी दुनिया नहीं डगमगा रही. मैं तुम्हे देख रहा हूँ, एकदम साफ़, स्पष्ट, लगातार. तुम जानती हो न कि गहराई में गहराई के अलावा और कुछ नहीं होता. गहराई एक लत है, नशा है. मेरे भीतर चारों ओर से आने वाले मध्यम संगीत के हर तार कांप रही है. अन्धकार, मेरी बंद आँखों को छू कर वापिस आता जाता रहता है. आवाज तुम्हारी मुझसे लुका छुपी खेल रही है, महक तुम्हारी पकड़म – पकड़ाई. कुछ निराकार धड़क रहा है; मैं अँधेरे का स्वर सुन रहा हूँ. रस्सी पर चल रहा हूँ, किस तरफ छलांग लगाऊँ; खिडकी पर खड़े खड़े वक़्त सो गया है.

इस बात को
दुनिया की हर एक कविता से बचा कर रखना
कि हर रात कॉरिडोर का ये बल्ब
मुझे तुम्हारी आँखों के और करीब ले आता है.

-शिवदीप

#ਹੈਰਤ6th

Write A Comment